Friday, July 13, 2007

वो सुन्दर या ख्वाब हमारे |




आंखों में एक सपना लेकर,

हसरत से वो देखा करती |

सब उसकी तारीफ़ करें पर,

जाने क्यों वो मुझपे मरती |


उसका चेहरा एक आइना,

होंठ गुलाबी शीतल से |

लगता जेसे ओस गिरे हों,

गुलाब कि पंखुड़ियों पे |


जिस्म मुलायम ऐसे जैसे,

नयी बर्फ कि चादर हों |

कज़ारारी आंखें हैं या फिर,

स्वप्न भरा कोई गागर हों |


बातें उसकी कितनी चंचल,

सबके दिल में करती हलचल |

अंगडाई में मदहोशी है,

साँसों में खुशबू हों बेकल |


सीने से आँचल जब सरके,

उड़ जाये फिर होश हमारे |

आओ एक मुक़ाबला कर लें,

वो सुन्दर या ख्वाब हमारे |

3 comments:

Anonymous said...

of course, your imagery is better.

sinhazz said...

Waah waah

Anonymous said...

Mast hai yaar