वक्त कि बात पे हालात कि आवाज आये |
किसको इलज़ाम दें जब खुद पे एतबार नही ||
हर एक आहट पे धड़कने थम सी जाती है |
कैसे कह दें कि मुझे उसका इंतज़ार नहीं ||
अपने हाथों कि लकीरों में खुद को दफ्न न कर |
हर कोई तेरे खयालों का राज़दार नहीं ।|
रंग भी रुप भी तबियत भी तलबगार भी हैं |
कौन कहता है आज ख्वाहिसे गुलज़ार नहीं ||
1 comment:
Good words.
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