Thursday, April 19, 2007

Straight from the heart...

वक्त कि बात पे हालात कि आवाज आये |
किसको इलज़ाम दें जब खुद पे एतबार नही ||

हर एक आहट पे धड़कने थम सी जाती है |
कैसे कह दें कि मुझे उसका इंतज़ार नहीं ||

अपने हाथों कि लकीरों में खुद को दफ्न न कर |
हर कोई तेरे खयालों का राज़दार नहीं ।|

रंग भी रुप भी तबियत भी तलबगार भी हैं |
कौन कहता है आज ख्वाहिसे गुलज़ार नहीं ||

1 comment:

Anonymous said...

Good words.