Tuesday, May 1, 2007

विजयीदीप

कर्म राह पर निकल पडे हो,
चाहे हर पल मौत खडी हो
पार समुन्दर जाना होगा,
विजयीदीप जलना होगा |

आज तलक तुम भटक रहे थे,
आज मिली है राह तुम्हे एक |
इसी राह पर चलना होगा,
चाहे कितनी मुश्किलें आयें |
इसको नहीं बदलना होगा |

आज जो बीज लगायी तुमने,
इसको पेड़ बनाना होगा |
पार समुन्दर जाना होगा,
विजयीदीप जलना होगा |

कुछ रिश्तों से दूरी करके,
आये हो कुछ रिश्ते बनाने |
हम तो तेरे साथ चलेंगे,
चाहे हो सब लोग बेगाने |
घर से जो वादा कर आये,
उस वादे को निभाना होगा

अश्रुरक्त बहाना होगा |
जीवन रथ चलाना होगा |
अंतर्कलह मिटाना होगा |
सबको गले लगाना होगा |
पार समुन्दर जाना होगा
विजयीदीप जलना होगा |

No comments: